Friday, April 29, 2011

दोस्तों, इन सभी लोगो कि बदौलत ही देश का ये हाल है

राजनैतिक दल सत्ता पाने की ललक में विदेशों से साठ-गाठ कर मात्र-भूमि का सौदा करने में लगे है |राजनीतिज्ञ लाभ के लिए देशवासियों में जाति,धर्म का विष घोलकर भारतीय अखंडता को खंडित कर रहे हो माफिया,बलात्कारी,हत्यारे,घोटाले-बाज विधानसभा और लोकसभा में बैठ कर देश वासियों का भविष्य तय कर रहे है |

कुछ महत्वाकान्छी,अवसरवादी,प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारी राष्ट्र संचालन की गौरवपूर्ण जिम्मेदारी को तिलांजलि देकर भ्रष्ट राजनेताओ के प्रतिनिधि बन कर राष्ट्रीय कोष खली करने में लगे है |

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकार भूल गया है कि पत्रकारिता कि पवित्र भाषा तथा पत्रकारों कि कुर्बानियों को जिन्होंने आजादी कि जंग में अंग्रेजों के जुल्मों तथा अत्याचारों कि परवाह किये बिना देशवासियों को आजादी दिलाने का महान कार्य किया था |लेकिन आज राजनीती कि तरह पत्रकारिता में भी असामाजिक तत्वों कि बैठक हो गयी है |

यही हाल हमारी वकालत से जुड़े वकीलों का है जो डिग्री प्राप्त करते समय अन्याय,अत्याचार का विरोध,न्याय कि मर्यादा तथा निर्दोषों कि रक्षा कि कसम खाने वाले वकील निहित स्वार्थों के कारन संवेदन शुन्य होकर किसी हत्यारे,बलात्कारी,घोटालेबाजों तथा देशद्रोही कि पैरवी करने में लगे हुए है |

दोस्तों, इन सभी लोगो कि बदौलत ही देश का ये हाल है |

इतने राम कहाँ से लाऊ

"कलयुग बैठा मार कुंडली, जाऊ तो ​​में कहाँ जाऊ मैं
अब हर घर में रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊ करेंगे
दशरथ कौशल्या जैसे मात - पिता, अब भी मिल जाय l
पर राम सा पुत्र मिले न, जो आज्ञा ले वन जाय l
भारत लखन से भाई को, में ढूँढ कहा से लाऊ "करूँगा

"जिसे समझते हो अपना तुम, जड़ें खोदता आज वही l
रामायण की बातें लगती है कोई सपना "करूँगा
"तब थी दासी एक मंथरा, आज वही में घर घर पाऊ l
"अब हर घर में रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊ" करूँगा

"रौंध रहे बगिया को देखो, खुद ही उसके रखवाले l
अपने घर की नीवं खोदते, देखे मेने घरवाले करेंगे
तब था घर का एक ही भेदी, आज वही हर घर पाऊ "l
"अब हर घर में रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊ" करूँगा

इतने राम कहाँ से लाऊ, इतने राम कहाँ से लाऊ l
इतने राम कहाँ से लाऊ, इतने राम कहाँ से लाऊ करेंगे

गरीबों का साल भर पेट भर सकता था

आज कोई भी राजनैतिक दल अपनी प्रतिबध्दता राष्ट्र और समाज के प्रति कम और अपने दल के प्रति अधिक प्रकट करता है |इसका सीधा-सीधा असर आम जनता की रोजमर्रा की आवश्यकतायों -रोटी,कपड़ा,मकान,स्वस्थ्य एवं शिक्षा पर पड़ रहा है|

"भारतीय स्वस्थ्य अनुसन्धान परिषद् " ने कुपोषण से बचने के लिए प्रति परिवार(दो व्यस्क और तीन बच्चों )के लिए कम से कम ५२ किलो ख...ाध्दान्न की आवश्यकता है |
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में केवल २५ किलो का वादा किया है,बाद में राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने ३५ किलो बी.पी.एल. परिवार के लिए और २० किलो सामान्य परिवार के लिए (इसमे दालों एवं तेल के लिए कोई प्रावधान नहीं है )|

दोस्तों,प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार,योजना आयोग के उपाध्यक्ष और कृषिमंत्री एक मत है की आर्थिक संकुचन के चलते सभी के लिए सस्ता अनाज मुहैया करा पाना संभव नहीं है |जबकि "हसन अली " पर प्रवर्तन निदेशालय ने ५० हजार करोड़ की कर चोरी का खुलासा किया है जिससे अकेले इसकी वसूली से देश के अधिकाँश गरीबों का साल भर पेट भर सकता था |