राजनैतिक दल सत्ता पाने की ललक में विदेशों से साठ-गाठ कर मात्र-भूमि का सौदा करने में लगे है |राजनीतिज्ञ लाभ के लिए देशवासियों में जाति,धर्म का विष घोलकर भारतीय अखंडता को खंडित कर रहे हो माफिया,बलात्कारी,हत्यारे,घोटाले-बाज विधानसभा और लोकसभा में बैठ कर देश वासियों का भविष्य तय कर रहे है |कुछ महत्वाकान्छी,अवसरवादी,प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारी राष्ट्र संचालन की गौरवपूर्ण जिम्मेदारी को तिलांजलि देकर भ्रष्ट राजनेताओ के प्रतिनिधि बन कर राष्ट्रीय कोष खली करने में लगे है |
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकार भूल गया है कि पत्रकारिता कि पवित्र भाषा तथा पत्रकारों कि कुर्बानियों को जिन्होंने आजादी कि जंग में अंग्रेजों के जुल्मों तथा अत्याचारों कि परवाह किये बिना देशवासियों को आजादी दिलाने का महान कार्य किया था |लेकिन आज राजनीती कि तरह पत्रकारिता में भी असामाजिक तत्वों कि बैठक हो गयी है |
यही हाल हमारी वकालत से जुड़े वकीलों का है जो डिग्री प्राप्त करते समय अन्याय,अत्याचार का विरोध,न्याय कि मर्यादा तथा निर्दोषों कि रक्षा कि कसम खाने वाले वकील निहित स्वार्थों के कारन संवेदन शुन्य होकर किसी हत्यारे,बलात्कारी,घोटालेबाजों तथा देशद्रोही कि पैरवी करने में लगे हुए है |
दोस्तों, इन सभी लोगो कि बदौलत ही देश का ये हाल है |
